दूरियां
दूरियां
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दूरियों में आज दोस्त अपनापन है
खत्म हो रहा कोरोना का अब गम है,
वो ही शख़्स अब प्यारे लगने लगे हैं
जो कहते थे हम तुमसे क्या कम हैं,
जितना दूर रहते मोहब्ब्त भी बनी रहती है
पास जाने पर हवा को भी हो जाता भ्रम है,
किसी के नज़दीक जाना,मतलब आग को छूना है
इस समय दूरी से ख़त्म हो रहे अच्छे-अच्छे बम हैं,
ये दूरियां हरा रही है,कोरोना को
ये दूरियां हरा रही है,महामारी को,
ये दूरियां जीता रही है,मानवता को
इसलिये लोकडाउन का पालन कर लो
ये दूरियां लड़ रही में से आजकल हम हैं।
