STORYMIRROR

manisha sinha

Others

3  

manisha sinha

Others

दुनियादारी

दुनियादारी

1 min
548

वो जिन पर दिल हमेशा

नाज़ करता था।

जिनकी छाया में हर पल

महफूज रहता था।

पुकारने की थी देरी, और

वो पास आ जाते।

आज लहू लुहान होने पर भी

कहीं नज़र नहीं आते।


सवालों से घिरे मन को

हमेशा पंख दिए जिसने।

मेरी सोच को हर वक़्त

आवाज़ दिए जिसने।

आज वो मेरे चीखने

पर भी समझ नहीं पाते।

हाथ पकड़ कर जिनके

चलना सीखे थे कभी

आज दो क़दम भी संग

चल नहीं पाते।


वह कौन है, जो हमें

रोक रहा है।

दुनियादारी के जाल में

जकड़ रहा है।

वक़्त क्या सच में इतना

क्रूर हो गया।

या मेरी मासूमियत में ही

कोई कोई दोष हो गया।

या मेरी मासूमियत में ही

कोई दोष हो गया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन