Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

दोस्ती

दोस्ती

1 min
295


लाख दोस्त ना चाहूँ मैं

ना चाहूँ हीरे मोतियों का हार

एक बस यारी हो

कान्हा सुदामा जैसी।


और हो जाऊँ

मैं धनवान,

क्या रिश्ते चाहे कोई

जब हो कोई एक खास।


संकट का जब समय आए

एक मित्र ही आए जब काम,

स्वार्थ ना हो कोई मन में

ना कोई दूसरा भाव। 


प्रेम ही प्रेम पाऊँ जीवन में

और जीवन हो जाए फूलवान।


Rate this content
Log in