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Fahima Farooqui

Others

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Fahima Farooqui

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दिल की आवाज़

दिल की आवाज़

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कुछ कहना है मुझे तुम सुनो तो।

साथ चलना है मुझे तुम चलो तो।


थक गई हूँ मैं सफ़र करते करते,

 कुछ देर रुकना है जो तुम रुको तो।


लिखती रहती यूँ तो शाम-ओ-सहर,

तुम पर लिखना है गर तुम पढ़ो तो।


सुना है मोहब्बत बढ़ती है दूरियों से,

दूर मुझे जाना है वजह तुम बनो तो।


मुझे कुछ कहना है जो तुम सुनो तो।

न अब जुदाई सहना है साथ रहो तो।


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