चित्रकार
चित्रकार
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चित्रकार अपनी कल्पना साकार करता है
रंगो और तूलिका से सुंदर रंग भरता है
प्रकृति,झरने, बहती नदियां सजीव हो उठती हैं
पक्षी प्राणी, फूलों से चित्रकारी सुंदर दिखती है
बगुला देखो कैसे चित्र में खड़ा है
चित्रकार जैनुद्दीन का पक्षी प्रेम बता रहा है
हमको जिंदगी का फ़लसफ़ा भी समझा रहा है
अपने लक्ष्य के प्रति इकटक देखते रहो
लक्ष्य मिले जैसे ही हाथ से जाने न दो
पैनी दृष्टि रखो अपनी मंजिल की ओर
पाओगे खुशियां जीवन में भरपूर।
