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Kusum Joshi

Children Stories

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Kusum Joshi

Children Stories

चिड़िया मैं भी बन जाऊं

चिड़िया मैं भी बन जाऊं

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एक चिड़िया ने मेरे घर में,

अपना घर बनाया है,

तिनका तिनका जोड़ जोड़,

सपनों का महल सजाया है,


दिनभर मेहनत करती है वो,

दाना चुगकर लाती है,

अपने छोटे बच्चों को,

प्यार से बड़े खिलाती है,


कभी सिखाती है उनको वो,

उड़ना नभ में ऊँचे ऊपर,

और कभी अपने बच्चों को,

चोंच से ही नहलाती है,


देख उसे मन करता मेरा,

चिड़िया मैं भी बन जाऊं,

उड़ूं साथ में नीले गगन में,

दुनिया सारी घूम के आऊं।


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