बसंत ऋतु
बसंत ऋतु
1 min
188
सर्दी अब ढल गई है
बसंत ऋतु खिल गई है
मौसम है मीठा मीठा,
अब ऋतु बदल गई है
लबों पर मेरे मुस्कान है
आबो हवा अब बदल गई है
अब दरख़्त की छाया,
शीतल करती है काया
अब सर्दी भी गल गई है
ये समय कुछ अलग है
सबके दिल में,
आंनद का भरा हुआ जग है
बसंत की ये ऋतु,अब
इंद्रधनुष सी खिल गई है
सर्दी अब ढल गई हैं
बसंत ऋतु खिल गई है
