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Anita Jha

Others

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Anita Jha

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बसंत पंचमी

बसंत पंचमी

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नव सौग़ात बसंत बहार लिए आई है 

“बसन्त पंचमी “

खिले हैं ऐसे ऐसे फूल जिसकी 

ख़ुशबुओं से चमक उठा जीवन संसार है।


एक तुम हो तो मौसम में भी बहार आ जाती है 

बिजली की चमक बन आ जाती हैं 

ख़ामोश ज़िन्दगी में रोशनी छा जाती हैं

जागती अजंता की तस्वीर बन जाती है। 

 

एक तुम हो तो मौसम बहारों का है

हो रहा हैं वसंतऋतु का आगमन 

खिल रहे हैं टेशुओ के फूल

आ गया है निखार बसंत बहार का है।


एक तुम हो तो मौसमी सपने 

बहारों का पैग़ाम दे जाती हैं 

खिलती कलियों फूल बन 

ख़ुशबुओं से मुस्कान छा जाती है।


बस ,एक तुम हो शबाब बन 

रंगीन ख़्वाबों को सज़ा 

ख़्वाईसों का नशा चढ़ा जाते हो

उम्मीदों का जहाँ बसा जाते हो।


एक तुम हों अन्तिम पड़ाव में भी 

आँखों की चमक बन कर 

श्रृंगार साज के साथ तुम्हारा हो

कभी साज टूटे ना कभी आस छूटे ना 

और कभी ये साथ कभी छूटे ना।



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