बसंत बहार
बसंत बहार
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आज बसंत की बहार है
चली फागुनी बयार है
ट्यूलिप की क्यारियाँ
गेंदें की फुलवारियाँ
पवन में है मदहोशियाँ
अंतस में लाई खुशियाँ
का से कहूँ सखी अपनी बतियाँ
सुनो सुनहरे फूलों की कलियाँ
सोने सी दमक केसर की महक
हर फूल पे भंवरे का है हक
प्रकृति आज मेहरबान है
गुलशन में आई बहार है
बसंत आया हर द्वार है
स्वागतम् बसंत हर बार है।
