बसंत बहार
बसंत बहार
1 min
333
आज बसंत की बहार है
चली फागुनी बयार है
ट्यूलिप की क्यारियाँ
गेंदें की फुलवारियाँ
पवन में है मदहोशियाँ
अंतस में लाई खुशियाँ
का से कहूँ सखी अपनी बतियाँ
सुनो सुनहरे फूलों की कलियाँ
सोने सी दमक केसर की महक
हर फूल पे भंवरे का है हक
प्रकृति आज मेहरबान है
गुलशन में आई बहार है
बसंत आया हर द्वार है
स्वागतम् बसंत हर बार है।
