बरसात
बरसात
1 min
160
बरसात का पानी
जाने कब बरसा था
जाने कब गिरी थी
मेरे आँगन में
वो बारिश की
नन्ही - नन्ही बूंदें
जिन्होंने मुझे फिर
लौटा दिया था
मेरा वो मासूम बचपन
जहाँ मैं मूर्ख था
बेफ़िक्र था
खुश था और सच कहूं
तो सच्चा भी था
आज कहाँ बरसता है
वो रिमझिम फुहार पानी
आजकल कहाँ रही
वो नदी नालों वाली मस्ती
बस्ती तो आज भी है
बस बसती नहीं आजकल....
