STORYMIRROR

Amit Kumar

Others

2  

Amit Kumar

Others

बरसात

बरसात

1 min
159

बरसात का पानी

जाने कब बरसा था

जाने कब गिरी थी

मेरे आँगन में

वो बारिश की

नन्ही - नन्ही बूंदें

जिन्होंने मुझे फिर

लौटा दिया था

मेरा वो मासूम बचपन


जहाँ मैं मूर्ख था

बेफ़िक्र था

खुश था और सच कहूं

तो सच्चा भी था

आज कहाँ बरसता है

वो रिमझिम फुहार पानी

आजकल कहाँ रही

वो नदी नालों वाली मस्ती

बस्ती तो आज भी है

बस बसती नहीं आजकल....



Rate this content
Log in