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Savita Gupta

Others

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Savita Gupta

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बोलती आँखें

बोलती आँखें

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इतराती ठुमकती

तोतली बोली तेरी लुभाती

घर आँगन में तितली सी उड़ती

गले में बाँहों का हार डालती

नीली मृगनयनी आँखें बोलती

मुस्कान तेरी हर थकान मिटाती

झट से पढ़ लेती मन की पाती


घर की चिराग़ तुझ में देखती

तू ही मेरी लौ की बाती

घर की रौनक़ तुझसे ही आती

तू ही मेरी जीवन की थाती

धड़कता दिल ज्यों तू बढ़ती जाती

सशंकित ह्रदय फ़न उठाती

डंसने को आतुर सँपोले देखती

पुरूष मन को टटोलती

आंचल फैला तुझको बचाती


फ्रॉक से कब लहंगा पहन

डोली में बैठी नीर बहाती

ससुराल चली मेरी जीवन ज्योति

तेरी मेरी आँखें झर झर बरसती

बहुत कुछ नि:शब्द आँखें बोलती



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