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Deepti S

Children Stories Drama Tragedy

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Deepti S

Children Stories Drama Tragedy

बंदर जैसा मुँह

बंदर जैसा मुँह

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हम तो मीठे के शौक़ीन कोई मौक़ा न छोड़ते बचपन से

हम थे पहली कक्षा में, जन्मदिन मना छोटे भाई का धूमधाम से


बचा केक देख मन ललचाया, माँ को अपनी बातों में फँसाया

माँ ने केक ऊँची सी जगह पर रख, कल देंगी कह हमें टरकाया


कैसे खाऊँ केक, मन इसी उधेड़ बुन में, चूहे भी उछल रहे उदर में

भोर में केक याद आया, माँ ने हमें विद्यालय भेज पीछा छुड़ाया


हम भी ज़िद्दी लौटे विद्यालय से, तो माँ को सोते हुए पाया

बेड पर तकिये लगा उतारा केक, फुर्ती से मुँह में गप गप खाया


कर के चूहों को शांत हम भी गये सो, शाम में मुँह भारी सा पाया

माँ को दिखाया, माँ मुँह देख डरी, फिर पूछा दिन में क्या खाया


अब आई पोल खुलने की बारी पर माँ को सब सच सच बताया

माँ ने देखा जाकर केक, जिस पर लाल चींटियों ने घर बनाया


माँ के मुख से कभी हंसी कभी डर के भाव झलक रहे थे

पर बड़ी बहन ने तो “बंदर जैसा मुँह” कह खूब मज़ाक़ बनाया


पिता जी के कार्यालय से आने का समय हुआ हमें डर सताया

पर पिता जी के आने पर, उन्होंने डॉक्टर पास ले जाकर बिठाया


पहले तो डॉक्टर ने भी सारी बात पूछ, ज़ोर का ठहाका लगाया

दवाई दी और कुछ भी खाने से पहले देखकर खाने का ज्ञान सिखाया



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