भूत से मत डर
भूत से मत डर
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डरना है किस बात से, हिम्मत से लो काम।
भय तो भाई है वहम, भूत प्रेत ज्यों नाम।।
अपनी साया क्यों डरे, होना मत भयभीत।
दिल से भय को त्याग दे,ऐ मेरे मनमीत।।
अंधकार कुछ भी नहीं,भ्रम है मन का यार।
मन का दीप जला जरा, सुन्दर सा संसार।।
नहीं भूत कुछ होत है, मन का है यह रोग।
डरने की क्या बात है, फिर भी डरते लोग।।
जितना सोचो फिर वही, बातें आती याद।
यूँ ही अपनी जिंदगी, होती है बरबाद।।
