भूल गई रिश्ता
भूल गई रिश्ता
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जगमगाते दीपों से एक प्रेरणा ले लो !
सबको ज्योति बाँटो और स्वयं जलो !!
मिटाकर अस्तित्व अपना दूसरों पर !
अँधेरा छांटो और तिमिर को भगाओ,l
लुटा कर अपना प्रेम व स्नेह जग में !
जग को प्रीतिमय कर दो, दूरी मिटाओ !!
जन मन खुशियों से खुशियाँ भर दो
अपने अंतर्मन में तृप्ती की लौ सुलगाओ,
संताप घिरा न हिय ब्रह्म-ज्योति की ज्योति दो,
खोर् सुलभा नवजीवन सा प्रकाश ।
