भरत महान
भरत महान
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नन्हा सा बालक वो
खेलता था सिंह से जो,
शौर्य का रस रंग छलका हो
भरत बनकर , धरा को अपने
भारत कहलाये वो।
जीवन जिसका वीरों सा
युद्ध में रणधीरो का
साहस उसमे भरा हुआ था
बचपन से वीर धीरो सा।
दया में दानबीर था
पृथ्वी का सूरबीर था
नाम था भरत जिसका ,वो
ऐसा सिंह विजय वीर था।।
