भ्रम
भ्रम
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रजिया की माँ
उसे जन्म देते है
इस दुनिया से चली गई
रजिया कभी अपनी
माँ का मुख नहीं
देख पाई
जब भी वो माँ के
बारे में पूछती
सिसकियां भरती
सब कह देते
तुम्हारी माँ
भगवान जी के पास
तो वो दौड़ कर
भगवान जी के पास जाती
और कह देती
भगवान जी मेरी माँ को
भेज दे
जब भी रजिया
भगवान जी से माँ को
भेजने को कहती
उसकी भाभी
उसके पास खड़ी होती
हर बार ऐसा ही होता
रजिया को ये भ्रम होता
भगवान जी उसकी बात
सुन रहे है
और वो भाभी में
अपनी अनकही माँ को
तलाशती है
