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हरीश सेठी 'झिलमिल'

Others

5.0  

हरीश सेठी 'झिलमिल'

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भ्रम

भ्रम

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कस्तूरी ढूँढ़े

जंगल बियाबान

मृग का भ्रम

नहीं टटोले नाभि

व्यर्थ हो जाये श्रम।


मानव बोला

लालच बुरी बला

है मेरे भ्राता

बिम्ब के भ्रम में ही

कुत्ता रोटी गँवाता।


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