भीगी धरती
भीगी धरती
1 min
317
जब बरसती है घनघोर काली घटायें
तपते हुए मैदान पर
भीग जाता है धरती का तन-मन
तब सौंधी गंध बिखेरती है धरा।
बरसात से
सावन में भीगो जाते है
नदियों के तट और
भीगा धरती का तन।
रेगिस्तन में बरसात में
भीगी धरती
सब के लिए सौंप देती है
अपनी कोख।
बस जाती है मचानों की दुनिया।
खेत-खलिहानों में
दूर तक फैल जाती है
हरियाली चादर, बरसात से
खेतों में भर आती है
फसल की देह
दाना गदराया देख
लहलहाते खेतों में
मुस्कुराती है
धरती माँ ।
