बेईमानी का पेट
बेईमानी का पेट
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मैं आदमी हूँ
कैसे भी अपनी थोथी
हसरतें पूरी करता हूँ
कोई मुझे ख़ुशी दे दे
इस चक्कर में दर दर
भटकता हूँ
बेतुकी बातों पर खीस
निकालकर हँसता हूँ
दो चार लोगों से मुंह ज मोख
अंधेपन की बातें करता हूँ
कभी खुद को और कभी
खुद की हँसी बेचता हूँ
जिससे मैं अपनी बेईमानी
का पेट भरता हूँ
