STORYMIRROR

Vaidehi Purushotam

Others

3  

Vaidehi Purushotam

Others

बचपन

बचपन

1 min
199

मासूमियत हो मुझ में

मौसम मृदंग बजाए

विद्यालय के प्रांगण में खेलूँ

मन प्रफुल्लित हो जाए

ज्ञान का आभार मानूँ

तितली देख मन हर्षाए

प्रेम व्यवहार करूँ मैं सबसे

संस्कार साथ इठलाये


मित्रता की परिभाषा जानूँ मैं

और मेरी पतंग उड़ जाए

खिलौने से खेलूँ जी भर के

कोई डाँट न पाए

कागज़ की नाव बहे बारिश में

माता पिता का साथ मिल जाए

मेरा बचपन कभी न बीते

जो खेल की सीख दे जाए।


Rate this content
Log in