बचपन की सहेलियां
बचपन की सहेलियां
1 min
838
जाने कहाँ खो गयीं
वो बचपन की सहेलियां।
सुबह की लालिमा सी
मन को हरषाती।
इतराती इठलाती
वो अल्हड़ अठखेलियां।
जाने कहाँ खो गयीं
वो बचपन की सहेलियां।
हँसी ठिठोली और
सुख दुख निभाती।
कड़ी धूप की वो
लगती परछाइयां।
जाने कहाँ खो गयीं
वो बचपन की सहेलियां।
पूनम के चाँद सी
अंधेरे को भगाती।
सितारों सी जगमगाती
जुगनुओं की रोशनियाँ।
जाने कहाँ खो गयीं
वो बचपन की सहेलियां।
काश जाता पीछे समय
सबको साथ बुला लाती।
वही झूला वही पेड़
वही पुरानी कहानियां।
जाने कहाँ खो गयीं
वो बचपन की सहेलियां।
