बचपन की बूंदें
बचपन की बूंदें
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चाहत है कुछ बूंदो की
जो बचपन मे मुझसे लिपटीं थी,
ख्वाहिश है उस खिलखिलाहट की
जो बेखौफ से चेहरे पर
दिखती थीं।
जरूरत है उस थकान की
जो शुकून की नींद
लाती थी।
इल्तज़ा है उस ख़ुदा से
एक बार फ़िर
मुझे वैसा बना दे
जैसे मैं बचपन में थी।
