बचपन के खेल
बचपन के खेल
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उम्र हो बचपन की या हो पचपन की
वो बचपन के खेल सुन यादें ताजा हो जाती हैं
आँख मिचोली,लंगड़ी टांग या हो चुपंछुपाई
शाम को गली मोहल्ले में बच्चों की रहती थी हुडदंगाई
पोशम पा,कोड़ा पीछे देख मार खाई थे निराले खेल
राजा मंत्री चोर सिपाही और अंताक्षरी में कभी न होते फेल
पकड़म पकड़ाई जैसे खेलों से सब रहते थे स्वस्थ
पर आजकल तो बस उँगलियाँ चला ऑनलाइन करते परस्त।
