बचपन का झरना
बचपन का झरना
1 min
333
रविवार सहर बचपन और चार यार
ये जीवन काश जी पाते एक और बार
दो कदम पर एक का घर फिर वो पेड़
फिर चार कदम चलने पर दो और यार
साथ सुनते पेड़ वाले बाबा की कहानी
और पास बैठने वाले चचा की सितार
वहाँ निकल भाग जाते हम फिर वो चाय दुकान
लेते काका से एक नीली टॉफी और इमली चार
थोड़ी दोस्ती, मार-कुटाई, यारी और झगड़ा-लड़ाई
दो पल का था वो रोना धोना और फिर खुशियाँ बेशुमार
छपछप पानी साथ नहाना उस पीछे वाले झरने में
वहाँ करते एक दूसरे पर हाथों से ठंडे पानी की बौछार
इन यादों से बचपन की इन बातों से सीखा जीवन
'साकेत' अब भी ढूँढा करता वो बचपन और चार यार
