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Saket Shubham

Others

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Saket Shubham

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बचपन का झरना

बचपन का झरना

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रविवार सहर बचपन और चार यार

ये जीवन काश जी पाते एक और बार


दो कदम पर एक का घर फिर वो पेड़

फिर चार कदम चलने पर दो और यार


साथ सुनते पेड़ वाले बाबा की कहानी

और पास बैठने वाले चचा की सितार


वहाँ निकल भाग जाते हम फिर वो चाय दुकान

लेते काका से एक नीली टॉफी और इमली चार


थोड़ी दोस्ती, मार-कुटाई, यारी और झगड़ा-लड़ाई

दो पल का था वो रोना धोना और फिर खुशियाँ बेशुमार


छपछप पानी साथ नहाना उस पीछे वाले झरने में

वहाँ करते एक दूसरे पर हाथों से ठंडे पानी की बौछार


इन यादों से बचपन की इन बातों से सीखा जीवन

'साकेत' अब भी ढूँढा करता वो बचपन और चार यार


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