STORYMIRROR

Richa Pathak Pant

Others

5.0  

Richa Pathak Pant

Others

बौराया वसन्त

बौराया वसन्त

1 min
337


वह देखो वसंत ऋतु आई

बौराई कैसी पूरी अमराई

खग-वृंदों ने भी ली अंगड़ाई।


थी अब तक शीत ऋतु ही छाई

शीत-लहरी ही बहती आई

अब मौसम ने ली अंगड़ाई।


प्रेमी जनों की पुकार पर यह आई

कवि वृंदों हेतु अवयव लाई

देते देव भी इसकी दुहाई।


बौराया अमलतास, कोकिल बौराई

बौराये खग-मृग, नवयौवना बौराई

प्रकृति भी नवजीवन पा मुस्कराई।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन