बातें
बातें
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बातों का क्या है
बातें तो होती रहती है
जब बात नही होती
तब भी बात रहती है
ख़ामोशी में भी भला
कभी ख़ामोशी रहती है
सच कहूं तो उस ख़ामोश आवरण में ही
असल बात रहती है
जहां हम सुन सकते है
स्वयं को स्वयं के लिए
अन्यथा यह बातें तो
यूँही निर्रथक बहती है......
नदी का नीर क्या
और नदी का तीर क्या
दोनों ही छोर पर
बातों की बात रहती है
कहने को बहुत कुछ है
पर जब कहो तब
बात कुछ नही कहती है
बातों का क्या है
बातें तो होती रहती है.......
