STORYMIRROR

Dharm Veer Raika

Children Stories Classics

4  

Dharm Veer Raika

Children Stories Classics

बाबुल...........।

बाबुल...........।

1 min
313

हाथ में तलवार घोड़ी पर सवार वो लक्ष्मीबाई

पीछे बंधे बेटे की परवाह छोड़कर

अंग्रेजों के सामने कुछ ने गंवाई

उस घर की रौनक घूम जब बाबुल को कर दिया झकझोर,


आया जब नानी का सुख में गम का विदाई दौर,

मेरा बेटी होना किस बात का है एहसान,

दुनिया क्यों है मुझसे से परेशान ,

प्राचीन समय में बहती थी नदी सिंधु,


मैं उसी देश की हूं चाहे मुस्लिम हूं या हिंदू,

बेटी इंद्रधनुष की तरह 7 रंगों की होती है,

कभी मां, कभी बहन, कभी बेटी का स्वरूप,

कड़कती सर्दियों में होती सुहानी धूप,


जब पिता की आंखें हुई नम जब बेटी से लिया बहू का रूप।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन