औरत की बेवफाई
औरत की बेवफाई
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औरत की बेवफाई पर हज़ार सवाल उठते है
क्या कभी किसी ने पुरुष के चरित्र को देखा
हर पुरुष सीता जैसी स्त्री की कामना करता है
क्या कभी किसी ने राम बनकर देखा
बाबुल ने अपने घर की इज़्ज़त की चाबी देदी
वहीं ससुराल में, खुलकर हँसने पर पाबंदी लगादी
जिसको मान बैठी, अपना प्रेम पति परमात्मा
क्या उस पुरूष ने कभी उसकी, अंतरात्मा को देखा
लाख व्यंग्य कसने के बाद, जिसको एहसास न हो
क्या उसने कभी अपनी पत्नी के अश्रुधारा को देखा
जिस पुरुष ने औरत की हमेशा अवहेलना की हो
क्या उसने कभी एक अच्छा जीवनसाथी बनकर देखा।
