STORYMIRROR

Rajinder Verma

Others

2  

Rajinder Verma

Others

अर्ज़ किया है

अर्ज़ किया है

1 min
179

कलम और दवात तो

फनाह हो गये

अब कैसे कोई दिल

के एहसास बयान करे 


कैसा ये तन्हाई का

आलम है

अब तो हवा भी

शोर सी लगती है 


क्या हसीन मंजर हो

गर ये बेलगाम जिन्दगी

हमारे इशारे की

तामील करे 


जहनी फितरत कौन

समझा है,

हम तो उम्मीद पर दावा

करते है


Rate this content
Log in