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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Children Stories Inspirational

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Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Children Stories Inspirational

"अपना प्यार परोसा करती थी।"

"अपना प्यार परोसा करती थी।"

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मां खाना नहीं, पर अपना प्रेम परोसकर लाती थी,

मां अपने हाथों से मुझे खिलाती थी।

उसे अपनी चिंता नहीं, मेरी चिंता सताती थी,

वो खुद भूखी रहकर मुझे खाना खिलाती थी।

वो खाने में जायके के साथ अपना प्यार मिलाती थी,

मेरी आत्मा और रूह को तृप्त कर जाती थी।

मुझे रोटी खिलाने के लिए अपने हाथ जलाती थी,

फिर सब रोटियां खाने के लिए मुझे वो मनाती थी।

ईश्वर को तो नहीं देखा, पर मां मुझे ईश्वर जैसी दिखती थी,

ईश्वर से भी ज्यादा दिन रात मेरी फिक्र करती थी।

मां मेरी कितनी परवाह करती थी,

रोटियों के साथ वो प्यार भी परोसा करती थी।



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