अनकहे रिश्ते
अनकहे रिश्ते
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तुम्हारा मेरा रिश्ता
कुछ खाली कुछ भरे पृष्ठों का।
कुछ गिले शिकवों का
कुछ खुशगवार लम्हों का।।
विरह में जो बरसे
उन अनगिनित अश्कों का।
बेरूखी से जो जन्मे
उन असंख्य जख्मों का।।
तुम्हारे बिन जो गुजरी
उन उदास विरान शामों का।
जिनका आधार तुम थे
उन गजलों उन गीतों का।।
कुछ नज़रों से कुछ अधरों से
कही-अनकही बातों का।
जो बांधता है हमें अनकहे रिश्ते में
उन भाव भरे जज्बातों का।।
