STORYMIRROR

Uma Shukla

Others

2  

Uma Shukla

Others

अनकहे रिश्ते

अनकहे रिश्ते

1 min
95

तुम्हारा मेरा रिश्ता

कुछ खाली कुछ भरे पृष्ठों का।

कुछ गिले शिकवों का

कुछ खुशगवार लम्हों का।।

विरह में जो बरसे

उन अनगिनित अश्कों का।


बेरूखी से जो जन्मे

उन असंख्य जख्मों का।।

तुम्हारे बिन जो गुजरी

उन उदास विरान शामों का।

जिनका आधार तुम थे

उन गजलों उन गीतों का।।


कुछ नज़रों से कुछ अधरों से

कही-अनकही बातों का।

जो बांधता है हमें अनकहे रिश्ते में

उन भाव भरे जज्बातों का।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन