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MS Mughal

Others

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MS Mughal

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अज़ीज़

अज़ीज़

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'हसन' हर दिल ए अज़ीज़ हुआ नहीं जाता 

'हसन' गिरते शबाब नौ खैज़ हुआ नहीं जाता 


गिरते शबाब ( गिरती जवानी ) 

नौ खैज़ ( जवान ) 

    

बेवजह तेवर बर तेवर तौर से बे तौर होना 

छोड़ो ये ख्याल तुमसे गुलरेज़ हुआ नहीं जाता


गुलरेज़ ( फूल बिखेरने वाला ) 


      

क्यूं कर कहे ये दिल फिदा है तुम पर जाना 

तुम से तो दिल ए खुद आवेज़ हुआ नहीं जाता 


दिल ए खुद आवेज़ ( खुद से दिल पेश करने वाला ) 

 

गुम हूं तेरे ख्याल ओ सूरत के एक दीदार में 

तुम से तो इश्क़ ए मआरेज़ हुआ नहीं जाता


इश्क़ ए मआरेज़ ( इश्क़ में डूब जाने वाला ) 


      

कैसे घुल मिल जाए तेरे दिल से ऐ बे दिल 

तुझ बे दिल से हम दिल ए आमेज़ हुआ नहीं जाता


हम दिल ए आमेज़ ( हमारे दिल से मिल जाने वाला ) 


   

यक ब यक सद जा बे पर्दा बे हिजाबी तेरी

बे शर्म से महव ए पर्दा आमोज़ हुआ नहीं जाता


महव ए पर्दा आमोज़ ( पर्दा सीखने में मशरूफ ) 


     

खाइफ हो गुम नाम गुमशुदा वीरानो में तुम 

इस तरह नहीं तेग ए चंगेज़ हुआ नहीं जाता 

  

बे सुरमगी निगाह क्या दिखाते हो हमे जाना 

बगैर पैमाने जाम ए सतेज़ हुआ नहीं जाता 


जाम ए सतेज़ ( जाम की नकल ) 

     

मय खानों में जाता है 'हसन' बड़े शौक से 

तुझ से क्यों खुमार अंगेज़ हुआ नहीं जाता 


खुमार अंगेज़ ( नशा बढ़ाने वाला ) 


     


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