STORYMIRROR

Harsh Mathur

Others

3  

Harsh Mathur

Others

ऐेे जिगर के टुकड़े

ऐेे जिगर के टुकड़े

1 min
180

तू वो टुकड़ा है

जो मेरे जिगर से

मेरी साँसे लेकर

मुझसे दूर हो गया है।


बंद किया मैने तुझे खोजना

यकीन दिलाया की पूर्ण हूँ मैं।

फिर से चलाई ये साँसे

खोजी दिलचस्पी रगों में।


तू अवाज़ लगाता है मुझे

मेरे हाल पूछता है।

मैं कहता हूँ मैं ठीक हूँ

तेरे जाने के बाद सब बढ़िया है।


तू देख़

फिर मौसम बदलेगा

मेघ बरसेंगे

धरती हरी होगी

और घाव भरे होंगे।


ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ