STORYMIRROR

sandeeep kajale

Others

2  

sandeeep kajale

Others

अगर तुम ना होते

अगर तुम ना होते

1 min
154

ज़िंदगी उलझनों में रहती

हर दफा एक कहानी कहती

तुम्हारी याद में खुद को जोड़ते।


चंद मुलाकात होती तुमसे

रूबरू होते तुम हमसे

अकेले में यूं तन्हा ना रोते।


कुछ पल सिरहाने लिये

अब तुम बिन कैसे जियें

नींद भरी आखों से नहीं सोते।


पलकें बुनती एक नया सपना

साथ हो तुम जैसा कोई अपना

हर घडी़ तुम्हें सामने ना पाते।


जुदा न होंगे तुम्हें फिर पाकर

दूर ना जायेंगे तुम्हारे ही होकर

बेखयाली में ही यूं खोते।


अगर तुम ना होते

अगर तुम ना होते।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन