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Ashu Kapoor

Others

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Ashu Kapoor

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अगर शब्दों के पंख होते

अगर शब्दों के पंख होते

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मन की अतल गहराइयों में

दबी हुई भावनाएं---

टूटी फूटी , कुचली हुई, 

मार दी गई,

जमाने के खौफ से----

दबा दी गई--- कामनाएं,

जब और गहरे----

और गहरे---

दबा दी जाती हैं----

जब सह नहीं पाती हैं---- घुटन,

तो, उफन जाती हैं,तब---

खुद-ब-खुद ढलने लगती है---

लेखनी--- लगाकर शब्दों के पंख--

फैलता जाता है फिर---

कागज पर दर्द----

बन जाती है फिर-- कोई नज्म,

रच जाती है कोई कविता,

आकार लेती है---

कोई कहानी,

मन में दबी भावनाओं को,

लग जाते हैं तब--- शब्दों के पंख,

विस्तार लेती है फिर---

कल्पना की उड़ान,

रचती है कलम खुद-ब-खुद,

कोई कविता महान,

दिल से निकली---

भावों की निर्झरिणी

लगा देती है फिर शब्दों को पंख

और यह मन उन शब्दों के साथ

निकल पड़ता है---

दूर बहुत दूर-------



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