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अंकित शर्मा (आज़ाद)

Others

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अंकित शर्मा (आज़ाद)

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अब जिंदगी का बस इतना फ़साना

अब जिंदगी का बस इतना फ़साना

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पहले चिड़ियों का वही चहचहाना

गुनगुनी धूप का फिर सख्त हो जाना

शाम को सूरज का रात में समाना

अब जिंदगी का बस इतना फ़साना


कभी तुम्हारा मुझे गले लगाना

कभी बिदक कर दूर हो जाना

कभी चूम कर सर मेरा सहलाना

अब जिंदगी का बस इतना फ़साना


साल का झटपट गुजर जाना

उन्हीं तारीख़ों का फिर लौट आना

मेरा रो जाना या फिर मुस्कुराना

अब जिंदगी का बस इतना फ़साना।


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