अब जिंदगी का बस इतना फ़साना
अब जिंदगी का बस इतना फ़साना
1 min
241
पहले चिड़ियों का वही चहचहाना
गुनगुनी धूप का फिर सख्त हो जाना
शाम को सूरज का रात में समाना
अब जिंदगी का बस इतना फ़साना
कभी तुम्हारा मुझे गले लगाना
कभी बिदक कर दूर हो जाना
कभी चूम कर सर मेरा सहलाना
अब जिंदगी का बस इतना फ़साना
साल का झटपट गुजर जाना
उन्हीं तारीख़ों का फिर लौट आना
मेरा रो जाना या फिर मुस्कुराना
अब जिंदगी का बस इतना फ़साना।
