आत्म कथा
आत्म कथा
1 min
126
हमने तो सूखे हुए समंदर देखें हैं
क्या क्या खौफनाक मंज़र देखें हैं
ठूंठ दरख्तों पर उजड़े हुए घोसलें
इन्क़लाब करते हुए बन्दर देखें हैं
मखमली बिस्तर पे बेचैन अमीर
और फक्कड़ मस्त कलंदर देखें हैं
फ़र्श से अर्श, ज़र्रे से आफताब बन
मिट्टी में मिलते हुए धुरंधर देखें हैं
चकाचौंध महलों में सुनसान रिश्ते
घनिष्टता झोपड़ियों के अन्दर देखें हैं
दिल में रहेंगे मगर साथ घर में नहीं
हमने अजय ऐसे भी सितमगर देखें हैं
