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कौन सी ऋतु थी? जब हवा में किसीके प्यार की सुगंध थी? किसने कितनी प्रतीक्षा की प्रेम के बहार की? प्या... कौन सी ऋतु थी? जब हवा में किसीके प्यार की सुगंध थी? किसने कितनी प्रतीक्षा की प्...
जब आस-पास महक रहा है, खामोश सुकून का एहसास तड़पते वादियों में से जब आ रही है मोहब्बत की पुकार जब आस-पास महक रहा है, खामोश सुकून का एहसास तड़पते वादियों में से जब आ रही है मोह...
पतझड़ में उसका दिल टूटा है दिल टूटा है पतझड़ में उसका उसकी आवाज़ साफ-साफ सुनाई दे रही हैं उसका दर्द... पतझड़ में उसका दिल टूटा है दिल टूटा है पतझड़ में उसका उसकी आवाज़ साफ-साफ सुनाई ...
दिखाई तो दे रहा था मन का पेड़ सूख रहा था हकीकत का सपना कितना काग़ज़ी था मन का पेड़ सूख रहा था दिखाई तो दे रहा था मन का पेड़ सूख रहा था हकीकत का सपना कितना काग़ज़ी था मन का पे...
मखमली बर्फ के तले जम गए सच्ची वफ़ा के ज़ख्मी वादे सुकून के लम्हों में चांदी कि परतों में चैन से लिपट... मखमली बर्फ के तले जम गए सच्ची वफ़ा के ज़ख्मी वादे सुकून के लम्हों में चांदी कि प...
अधूरा इश्क़… दिल का बसंत… प्रेम कविता… प्रेम कविता… मुलाक़ात की बैचेनी… बैचेनी की साँस... प्रेम कवि... अधूरा इश्क़… दिल का बसंत… प्रेम कविता… प्रेम कविता… मुलाक़ात की बैचेनी… बैचेनी ...
एक काग़ज़… हमेशा रिक्त नहीं होता है, वहाँ होती हैं अनगिनत ख़्यालों की हलचल एक काग़ज़… हमेशा रिक्त नहीं होता है, वहाँ होती हैं अनगिनत ख़्यालों की हलचल
हम भी , आप भी... बेरुखी भी हम भी, आप भी... सादगी भी हम भी , आप भी... बेरुखी भी हम भी, आप भी... सादगी भी
एक साया धुंध का, जहाँ ,कुछ ख्वाब, ख्वाहिशें और रास्ते, धुंधले नजर आते हैं एक साया धुंध का, जहाँ ,कुछ ख्वाब, ख्वाहिशें और रास्ते, धुंधले नजर आते हैं
विरह के बहते पानी में, हाँ, बहते पानी के विरह में, कुछ परछाइयाँ दिखाई देती हैं, किसकी है, ये परछाइय... विरह के बहते पानी में, हाँ, बहते पानी के विरह में, कुछ परछाइयाँ दिखाई देती हैं, ...