ऊँची हवेली मीठी जलेबी
ऊँची हवेली मीठी जलेबी
पड़ोस के घर से तरह तरह के व्यंजनों की महक आ रही थी पता किया तो पता चला उनकी बेटी की सगाई तय हो गई है और आज मेहमानों के लिए भोज का आयोजन किया गया है। सारे मेहमान बस आने ही वाले थे ।
घर में काम करनेवाली बेलमती की बेटी नन्हीं मुनिया तक ज़ब इन व्यंजनों की महक पड़ी तब उसने थोड़ी सी मिठाई मांगी तो मालकिन ने उसे डांट दिया यह कहकर कि...
"अभी तक तो मेहमानों ने खाया ही नहीं तो भला घर की नौकरानी की बेटी को कैसे दे दें!'"
तभी आगे बढ़कर घर की बुजुर्ग दादी ने कहा,
" बहुरानी दे दो ना ... थोड़ा सा पकवान उसे भी। आखिर मेहमान तो बाद में आयेंगे। और बेटियों में लक्ष्मी का वास होता है।
अगर घर की लक्ष्मी भूखी रहेगी तो यह एक तरह से लक्ष्मी का अपमान होगा!"
दादी की बात सुनकर मुनियां बहुत खुश हो गई और उसकी मां ने उसे गोद में बिठाकर पहले घर की लक्ष्मी को भोजन करा दिया।
आज मुनियाँ को अपने पसंद की मिठाई जलेबी खाकर जितनी तृप्ति हो रही थी,
उससे कहीं ज़्यादा इतना
मान सम्मान पाकर वह नन्हीँ बालिका खिलखिला रही थी।
आज... जलेबी की मिठास कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई थी।
