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गर्म तवा
गर्म तवा
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© Alok Phogat

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गर्म तवा

माँ, आलोक को समझा रही थी कि बेटा बाहर से झगड़ा करके मत आया कर, लेकिन माँ मैं तो गरीब ओर असहाय लोगों की भलाई के लिए लड़ता हूँ, कोई किसी को सताए यह मुझे बर्दाश्त नहीं । आलोक एक अच्छे डील डॉल वाला लड़का था और अन्याय बर्दाश्त नहीं करता था वह ।


एक दिन की बात है, सब बैठे टी वी देख रहे थे कि अचानक घर में तीन लड़के घुस आए एक के हाथ में चाकू, एक के हाथ में हॉकी और एक के हाथ में चैन । आंगन में आकर बोले निकल बाहर आलोक की औलाद तुझे भी मारेंगे ओर तेरे घरवालों को भी । उनकी ललकार सुनकर सब आंगन में आ गए। मां, जो उस समय रसोई में सबके लिए रोटी बना रही थी, सब ताड़ गई ।आव देखा न ताव, गर्म दहकता तवा हेंडिल से पकड़कर बिजली की तेजी से लपककर एक के कान पर, एक के हाथ पर, एक के पीठ पर टिका दिया। उन्हें कोई मौका ही न मिला। जलन के मारे उनके हाथ से चाकू, चेन, हॉकी छूट गए तब तक घर के लोगों ने उन्हें दबोच लिया


आलोक उन्हें पहचान गया। ये उसी के कॉलेज के लड़के हैं, जिनके चंगुल से उसने इंदु (आलोक की दोस्त) को छुड़ाया था। आलोक ने सब घरवालों के हाथ जोड़े की इन्हें पुलिस के हवाले न करें, इनका भविष्य बर्बाद हो जाएगा, इन्हें इनकी सजा मिल गई , क्योंकि अभी भी जलन के मारे वे तिलमिला रहे थे।


माँ ने उन्हें समझाया कि यदि उनके हाथों कोई गलत काम हो जाता तो वो फांसी पर लटकते या जेल में सड़ते ओर माँ बाप सारी जिंदगी रोते। वे अपनी ग़लती मानकर सभी परिवार के सदस्यों से माफी मांगकर माँ के पैरों में गिर गए ओर चले गए

घर के सब सदस्य मां की तारीफों के पुल बांध रहे थे।


आलोक फोगाट ।


माँ बेटा गरीब सहायता

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