STORYMIRROR

कल्पना 'खूबसूरत ख़याल'

Others

4  

कल्पना 'खूबसूरत ख़याल'

Others

बसन्त

बसन्त

1 min
593

बसन्ती हवाओं ने मौसम

को गुलाबी कर दिया

है घास में छोटे छोटे

फूल खिल चुके हैं

पौधों में नई पत्तियां आ चुकी हैं


ऋतुराज के आने की आहट

खेतों में फूली सरसों ने

पहले ही बता दी थी

गेंदा- गुलाब सब महक रहे हैं


औरतें राग गया रही हैं

बच्चे मुस्कुरा रहे हैं


मग़र जिंदगी मुझे झूठे दिलासा

दे रही है, धरती पर बसन्त बिखरा है

पतझड़ बस मेरे आंगन में है।


Rate this content
Log in