धरती मेरी प्यारी धरती
धरती मेरी प्यारी धरती
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अन्न हमारी शक्ति है,
किसान की यह भक्ति है,
इस मिट्टी का जादू देखो
फल -फूलों की बहार ले लो,
आम संतरा, सेब, अंगूर
खट्टे मीठे विविध स्वादों से,
मन को आनंद से कर देते भरपूर
इक बीज को घना पेड़ बनाकर,
यह मिट्टी ही देती अनुपम उपहार
किसान की भक्ति से ही यह,
धरती भारत की उगलती स्वर्ण अपार
अन्न ही वह स्वर्णिम सोना जो,
बिखरा चारों ओर है
पीली सरसों झूमझूम कर,
करती यह जय घोष है।
