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Bhawna Kukreti

Others


4.5  

Bhawna Kukreti

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ज़रूरत -1

ज़रूरत -1

3 mins 242 3 mins 242

 ज़िंदगी हमेशा दो बातों के बीच बहती हुई बढ़ती है; संभावनाएं और आशंकाएं।दोनों में कोई फर्क नहीं सिर्फ जिन्दगी की जरूरतों से फर्क हो जाता है। कल एक बेचैन इंसान के लिए टैरो कार्ड्स रीड कर रही थी ,मालूम नहीं था कि जिंदगी का ये रंग मेंरे सामने इस तरह बिखरेगा जैसे किसी इंद्रधनुष के रंगों को अपना क्रम बदलते हुए देखना, नामुमकिन सा अविश्वसनीय लेकिन हकीकत में वह था " इंद्रधनुषी" ।

 हुआ यूं कि मैंने पर्सनल रीडिंग देना रोक लिया था, मेरी सेहत मुझे allow नहीं कर रही थी।मगर जिस तरह हाथ धो कर आंसुओं में भीगा निवेदन बार बार मन के दरवाजे पर हो रहा था उससे हिम्मत कर ही दी।

"हेलो मैंम ,किस तरह आपको शुक्रिया अदा करूं "

"हेलो ..पर में समझी नहीं अभी तो रीडिंग शुरू भी नहीं कि..आप किस बात का शुक्रिया अदा कर रहीं हैं आप।"

"जी आपने वक्त निकाला हमारे लिए" 

"ओह! "

"..."

"?"

" मैंम हमारी जिंदगी में तूफान आ गया है..."

लगभग 10-15 मिनट तक मैं उनकी बात सुनती रही। 

"मैंम आप समझ रही हैं न मेरे हालात?!"

"जी...समझ रही हूँ।"

"अल्लाह आपको सेहत नवाजे मैंम, बस मेरे लिए रीड कर दें ।"

 मैंने टैरो रीडिंग का प्रोसेस शुरु किया। उनकी एनर्जी कार्ड्स में बेहद ऑब्वियस थी। लेकिन जिस बात /रिश्ते/इंसान के लिए वो जानना चाह रही थीं उसमे मुझे ग्रे ज्यादा दिख रहा था। बड़ी अजीब सी सिचुएशन थी। ये जो इंसान पूछ रहा था वो बेहद डिस्टर्ब था।ख़ैर गाइडेंस यही मिली कि उनको अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए।मगर ये उनके लिए कतइ आसान नही था। जिंदगी में दर्दनाक हादसे के बाद कई सालों का रिश्ता था जो कागजों पर नहीं मगर दुनिया की नज़र में और दिल मे शौहर की मानिंद दर्ज था। तलाक़ के बाद किसी इंसान को दुनिया की नजरों में शौहर का दर्जा देना उसके हर मुश्किल में साथ देना मगर कागजों पर उसे शौहर के नाम पर कबूल कर पाने की हिम्मत न हो पाना महज इसलिए कि माज़ी के घाव ...नासूर से जाग रहे हों।अजीब सा ही था सब ।लेकिन अचानक ही वो इंसान किसी और को बीवी का दर्जा दे जाय वो भी चुपचाप अपने हमकदम से बिना कुछ कहे।

  मैं शायद कॉर्ड कटिंग करना भूल गयी थी या ज्यादा ही असर हुआ उसकी कहानी का की अगले 3-4 दिन तक बस जरा खाली समय होता तो दिमाग उसी की जिंदगी को सोचती रहता।क्या हुआ होगा? उसने क्या रुख अख्तियार किया होगा? की अचानक एक दोपहर ख्याल कौधा 'एक तीसरा भी तो है? उसका क्या ?क्या उसको खबर है?क्या उसने सब जानते बूझते निकाह में जाना कबूल किया?" 

  बहर हाल अपने नए रूटीन में में लाइव रीडिंग दे रही थी कि एक नए फॉलोवर ने व्हाट्सअप पर अपनी क्वेरी लिख भेजी।अमूमन लाइव के दरम्यान कोई काल या मेसेज पर गौर नहीं करती लेकिन जब से इस स्पिरिचुअल वर्ल्ड के साथ समय बीत रहा है यकीन होता जाता है कि सब कुछ आपस मे गूंथा हुआ है सो नजर पड़ ही गयी।

  " मैंम प्लीज़ देख कर बता दें हमारी रुखसती कब होगी?"


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