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Vinay Panda

Others

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Vinay Panda

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उस रात...

उस रात...

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एक रात की बात जिसे हम आज भी याद करते हैं कभी-कभी, जिसे दिल चाहकर भी नहीं भूल पाया कभी!


घर में शादी का प्रोग्राम था। रिश्तेदारों से घर खचाखच भरा था।

दूर की रिश्तेदार दो अजनबी लड़कियां मेरे ही उमर की भी शादी में मेरे घर आयीं थी।

मेरा भी विद्यार्थी जीवन, किशोर अवस्था जिन्हें देखते ही

मेरे नजरों को वो भा गयीं...!


शाम का समय हम भी फुरसत में होकर जब उनसे मुलाक़ात की तो पता चला दोनों अपने आप में बेमिसाल थी। बातो-बातो में दिल आ गया मेरा उनपर और शायद वो भी चाहने लगी थीं हमें, ऐसा हमें उनकी नजरों के हाव-भाव से पता चल गया था।


धीरे-धीरे रात गहरी होने लगी, बातों का सिलसिला जारी रहा, बीच-बीच में दादी टोक कर डांटती थी उन्हें...

सो जाओ तुम लोग उसे क्यूँ जगा रही हो सुबह काम करने होंगे उसे...

अब दादी को कौन समझाता की अच्छा तो मुझे भी लग रहा था..!

धीरे-धीरे रात की भोर गयी रात भर थी जो करीब दिन में दिल से वो दोनों दूर हो गयीं...


दो दिन तक यही सिलसिला चलता रहा शादी के दूसरे दिन ही छोड़कर वो दोनों अपनें घर चली गयीं...

दिल मानने को तैयार नहीं था रात अक़्सर खुली आँखों में ही गुजरनें लगी...


जमाना ख़त का था धीरे-धीरे प्रेम परवान चढ़नें लगा। एक दिन ऐसा आया कि शादी का ऑफर क्या आया वक़्त ने सब मेरे प्रेम को धराशायी कर दिया..!


प्रेम अपना पवित्र था उस समय और आज भी।

मेरी आज भी बात होती है दिल की उनसे, कुछ शिक़वा-शिक़ायत होती है बीती घटनाओं पर, मगर दिल में कोई गुरेज़ आज भी नहीं है।

बस उस रात की शुरुआत शायद प्रेम उनका मरनें के बाद ही भूले..!


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