सोलमेट की अणु
सोलमेट की अणु
कहा जाता है कि अरस्तू (Aristotle) अपने शिष्य सिकंदर महान (Alexander the Great) को हमेशा औरतों की संगति से दूर रहने की नसीहत किया करता था। इस वजह से हरम की औरतें उससे बहुत नाराज़ रहती थीं.
एक दिन उन्होंने मिलकर एक चाल चली. उन्होंने एक बेहद ख़ूबसूरत, शरारती और आकर्षक दासी को अरस्तू की सेवा में भेज दिया. उस दासी ने अपने हाव-भाव और अदाओं के जाल में अरस्तू को फँसा लिया और एक दिन अचानक शर्त रख दी कि अरस्तू घोड़ा बने और वह उसकी पीठ पर सवारी करेगी.
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जब यह मशहूर-ए-ज़माना वाकिया हो रहा था. ठीक उसी वक्त हरम की सारी औरतें सिकंदर के साथ कमरे में दाख़िल हो गईं. सिकंदर ने अपने उस्ताद को एक दासी के लिए सचमुच "घोड़ा" बने देखा तो हैरान होकर बोला.
"ऐ उस्ताद! ये क्या उस्तादी है? हमें औरतों से दूर रहने की नसीहत करते हैं और खुद ये...?"
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अरस्तू जो बहुत चालाक था. तुरंत उठ खड़ा हुआ और मुस्कुराते हुए बोला:
"मेरे प्यारे शहंशाह! यह सब कुछ तुम्हारी ही तालीम के लिए किया गया है. खुद सोचो, जो औरत अपने उस्ताद को घोड़ा बना सकती है, वह तुम्हें तो गधा बनाकर रख देगी...! 😂
