संगठन की शक्ति
संगठन की शक्ति
कॉमिक्स एक माध्यम है,
जहाँ विचारों को व्यक्त करने के लिए सामान्य पाठ्यक्रम के अपेक्षा चित्रों, एवं बहुधा शब्दों के मिश्रण तथा अन्य चित्रित सूचनाओं की सहायता से पढ़ा जाता है। बचपन में सुनी हुई कहानियां आजकल कॉमिक्स के माध्यम से बच्चों को सुनाई और समझा ही जाती है
काॅमिक्सों में निरंतर किसी भी विशिष्ट भंगिमाओं एवं दृश्यों को चित्रों के पैनल द्वारा जाहिर किया जाता रहा है। इसके माध्यम से समझने में बहुत ही आसानी होती है।
बचपन में टॉम एंड जैरी, छोटू लंबू,
सिंड्रेला,चाचा चौधरी और ऐसी बहुत सारी कहानियां कॉमिक्स में पढ़ी हैं।
उसमें से एक कहानी मैं आपको सुनाती हूं । जो मैं अपने नाती पोते को सुनाती थी
और हमारी बुआ जी हमको सुनाते थे।
मेरे शब्दों में मेरी कहानी
एक बाप के चार बेटे थे ।वह चारों लड़ते बहुत थे। और उनके पिता बहुत परेशान थे।
जब उनके पिता बहुत बीमार हो गए,
बहुत परेशान थे कि मैं तो चला जाऊंगा।
और यह ऐसे ही लड़ते हुए सारा घर नष्ट कर देंगे। तो उन को समझाने के लिए उनको एक युक्ति सूझी। उन्होंने एक लकड़ी का गट्ठर मंगवाया ।
वे अपने लड़कों को पास बुलाते हैं । और कहते हैं, तुम इसमें से एक लकड़ी ले लो ।
जब सब लड़के एक एक लकड़ी लेकर खड़े हो जाते हैं।
तब यह बोलते हैं, इसको तोड़ो।
तो वे लोग सब आसानी से उसको तोड़ देते हैं।
फिर वह बोलते हैं, अब एक एक लकड़ी ले लो। सब वापस एक एक लकड़ी उठा लेते हैं।
फिर वे बोलते हैं अब इन लकड़ियों का गट्ठर बना दो, सबको साथ में बांध दो ।
वह लोग ऐसा ही करते हैं।
फिर वह बोलते हैं अब इसको तोड़ो ।
लड़कों से वह नहीं टूटता ।
तब यह कहकर समझाते हैं,
कि जब तुम अलग अलग रहोगे तो तुम को कोई भी तंग कर सकता है ।
और तुम इस लकड़ी की जैसे टूट सकते हो । लड़ाई करोगे तो ऐसा ही होगा ।
दूसरे लोग भी तुमको तोड़ देंगे।
और तुम जब सब जने चारों साथ रहोगे तो एक मुट्ठी बन जाओगे। और संगठन की ताकत देखी तुमने, यह लकड़ी का गट्ठा जैसे तुम सब साथ तो तुम को कोई तोड़ नहीं सकेगा।
कोई हानि नहीं पहुंचा सकेगा ।
तो मनचाहा काम कर सकोगे ।
इसलिए तुम यह लड़ाई झगड़ा छोड़कर और सब आपस में लकड़ी के घर गट्टठर के जैसे मिल जुल कर रहो। और लड़के सब अपने पिता की बात मान जाते हैं तो पिता शांति से जीने लगते हैं।
मुझे यह कहानी बहुत अच्छी लगी ।
और आज तक उसी तरह से याद है।
आज लिखते हुए मुझे उसकी पिक्चर्स सामने आ रही है। कॉमिक तो बहुत ही अच्छा जरिया था। मुझे मेरी बुआ जी की शक्ल सामने नजर आ रही है इतने प्यारे ढंग से भी सुनाती थी यह कहानी और हमको समझाती थी और हमने अपने जीवन में उसको ता है अपने परिवार को एक मुट्ठी के जैसे बांध के रखा।
