समझदार
समझदार
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हठी पुत्र को बहुत बार समझा-बुझाकर,थक-हार गया पिता आखिर तैश में आकर बोला-दुनिया के तमाम बच्चे समझ जायेंगे, पर तुम नहीं समझोगे।
ढीठ पुत्र बड़ी निर्ल्लजता के साथ बोला-यस, पापा !दरअसल वो सारे बच्चे ही नासमझ हैं,जो समझ जाते हैं।मैं उनमे से नहीं,क्या?मैं इतना नासमझ नहीं कि सब समझ जाऊँगा।जाइए, मैं नहीं समझ सकता।जो करना है कर लो।
अब पिता की समझ में सब आ गया कि बच्चा अब नासमझ नहीं रहा।समझदार होने लगा है।
