Sanchit Srivastava

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रणविजय सिंह उर्फ इरफान खान

रणविजय सिंह उर्फ इरफान खान

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"और जान से मार देना बेटा, हम रह गए ना, मारने में देर न लगाएँगे। भगवान क़सम। 

एक बात सुनो पंडित, तुमसे गोली वोली न चल्लई, एसा करो मंतर फूँककर मार देयो स्साले"

एकदम जबर डायलाग और उसपे से इतनी गजब की अदायगी वो भी फ़ुल फ़्लेज़ एक्स्प्रेशन के साथ। मज़ा ही आ गया। कैरेक्टर का नाम था रणविजय सिंह।

छात्रनेता रणविजय सिंह से पहली मुलाक़ात हॉस्टल में सीनीयर के लैपटॉप पर “हासिल” देखते हुए हुई।

अपने डायलॉग की एक लाईन में ही रणविजय सिंह ने लड़कपन पर खड़े इस दर्शकवर्ग के दिलोदिमाग़ में अपनी एक जगह बना ली थी।

वैसे भईया आप लोग। हासिल देखे हो। अगर नहीं।तो फ़िर क्या देखे हो बे ज़िंदगी में बस चाँद तारा। आज देखना रणविजय ताउम्र साथ रहेगा, चाहो तो लिख लो नोट कल्लो।

धीरे २ पता चला इनका असली नाम है इरफ़ान खान विद् डबल R। फिर याद आया इनको चन्द्रकांता में भी तो देखा था और श्रीकांत याद है अरे हाँ वही फ़ारुख़ शेख़ वाला। एक धूर्त पति का क्या अभिनय किया था इन्होंने। 

अभी पाँच छः महीने पहले कही से “श्रीकांत” उपन्यास मिल गया, पढ़ने लगा फ़िर याद आया इस नाम का सीरीयल भी आता था। देखना शुरू कर दिया। कुछ एपिसोड बाद इरफ़ान खान की एंट्री होती है।शुरुआत एक भले आदमी के चरित्र से होती है और देखते ही देखते कैसे लोमड़ी की धूर्तता चरित्र में डाल देते हैं बड़े बड़ों की समझ से बाहर है।

रणविजय सिंह के बाद मुलाक़ात हुई “बाग़ी सूबेदार पान सिंह तोमर से”।बाग़ी इसलिए क्योंकि दद्दा इन्ने ही कही थी ”बीहड़ में बाग़ी होते हैं, डकैत मिलते हैं पल्लियामेंट में”। मिलते हैं कि नहीं मिलते हैं ।"कओ हां"

आजतक ऐसा कभी नहीं हुआ किसी हीरो के जाने से दिल उदास और आँख नम हुई हो, न कभी नहीं हुआ। पर रणविजय भईया हीरो नहीं एक्टर थे एक्टर। बहुत ही कम कलाकार ऐसे होते हैं जो परदे पर भले ही एक सेकंड को आए पर मन पर छाप एक उमर की छोड़ जाते हैं।

बस भगवान इनका Hutch का छोटा रीचार्ज थोड़ा बड़ा कर देता तो क्या ही बात थी पर ये साली ज़िंदगी। ख़ैर थिएटर से लेकर जुरासिक पार्क तक धमक जमाई थी रणविजय भईया ने।

एक दिन मक़बूल मिला जिसकी आँखे ही काफ़ी थी सामने वाले के दिल में घर करने के लिए, उसने कहा था भाईंयो के बीच में कोई नहीं आएगा, पर कैंसर आ गया। लेकिन मक़बूल मियाँ तुम्हारे जाने से आज दुःख का दरिया घुसा है तुम्हारे चाहने वालों के घर में।

रणविजय भईया तुम्हारे चाहने वालों ने तुमसे तीन क्या कई बार इश्क़ किया और हर बार ऐसा इश्क़ मतलब जानलेवा इश्क़, मतलब घनघोर हद पार।क्योंकि भईया “ I like Artist’s “

ख़बर ऐसी है कि दिल गवाही नहीं दे रहा इसे सच मानने को। काश ये मीडिया इसको भी फ़ेक न्यूज़ करार दे दे। शायद कुछ दिन लग जाए दर्द या सच जो भी है क़बूलने में।

रणविजय भईया ने कहा था“ हम अपनो के हाथों नहीं मरने वाले भईया, कोई बहुत बड़ा बदमाश मारे तो मारे”

ये साला कैंसर बड़ा बदमाश निकला, मार गया रणविजय भईया को। अरे गोरिल्ला वार करना चाहिए था ना, हम सब तो गोरिल्ला थे न।

पर आज भी दिल के किसी कोने में हॉस्टल के उस कमरे में लैप्टॉप पर रणविजय सिंह, गौरीशंकर पांडेय से बोल रहा होगा “ एक बात सुनो पंडित, तुमसे गोली वोली न चल्लई, ऐसा करो मंतर फूंककर मार दो हमें”

बाक़ी रणविजय भईया ज़िंदाबाद।कओ हाँ। जिंदाबाद।

“इक बार तो यूँ होगा, थोड़ा सा सुकूँ होगा

ना दिल में कसक होगी, न सर में जुनूँ हो।


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