Swati Rani

Tragedy Inspirational


4.5  

Swati Rani

Tragedy Inspirational


परवरिश

परवरिश

4 mins 147 4 mins 147


एक निसंतान दंपति थे, राजीव और कृष्णा! शादी के 10 साल के बाद भी उनकी कोई संतान नहीं हुयी थी! पता ना कहाँ- कहाँ मन्नते मांगी, पता ना कहाँ-कहाँ मत्था टेका तब जा कर उनकी मन्नत पुरी हुयी, उनको एक लड़का हुआ! पुरे गांव में मिठाईयाँ बंटी, खुब जश्न हुये!

धीरे-धीरे वो बच्चा बड़ा होने लगा, नाम रखा गया रमेश, उसकी सारी जिद्द पुरी कि जाती, आखिर खानदान का इकलौता वारिस जो था, वो भी लड़का!

एक बार एक कंकड़ राजीव के मुंह में आया और कृष्णा ने खाना रमेश के मुंह का उगलवा लिया, इस कदर प्यार करती थी कृष्णा उसे!

अगर रमेश छींक भी देता तो रात-रात भर सोते नहीं थे दोनों!

लड़का पढने में भी होनहार था, बाहर से पढाई करके आया वो भी डाक्टरी की! माँ- पापा का सीना गर्व से चौड़ा हो गया! शहर में क्लीनिक खोला, कुछ दिन में क्लीनिक चल गया! एक बार मां-बाप शहर अपने बेटे के यहां गये, तो देखा बेटे ने अच्छा घर बना रखा है, अपने पैसे से! खुब ठाठ-बाट थी! कुछ दिनों में समझ में आया कि बेटे ने अपने लिये, लड़की भी चुन ली है, दोनो की आनन-फानन में शादी कि तारीख भी निकल गयी!फिर शादी भी हो गयी! 

अब धीरे- धीरे रमेश का फोन आना कम हो गया! इधर राजीव का शरीर भी थक गया था, उन्होने सोचा बेटे का हाल खबर लिया जाये और थोड़ी मदद भी मांगी जायेगी, सो अकेले शहर गये, कृष्णा जी गांव में ही रह गयी, उनकि तबीयत थोड़ी खराब थी!

अपने बेटे के यहाँ जाते के साथ उन्होंने देखा, दो छोटे- छोटे बच्चे घर के सामने खेल रहे थे, उनको समझते देर ना लगी वो उनके पोते-पोती थे! उन्होंने उन दोनों को गले लगा कर खुब प्यार किया, उनकी आंखे भर आयी! अंदर जाने को घंटी बजायी तो अंदर बहु थी, दरवाजा खोल कर उनको कुत्तो के पास के बेंच के साथ बैठा के अंदर चली गयी! राजीव जी ने सोचा ही था कि पानी मांगे पर उन्होने अपनी ईच्छा दबा ली! 

तभी अंदर से लड़ने कि आवाज आयी, रमेश कि बीवी चिल्ला रही थी, आ गये तुम्हारे पापा पैसा मांगने सिर्फ खर्चे का घर है, इतना भी सबर नहीं हुआ, कहे देती हु सुन लो, एक रुपया नहीं देना है, ये कोई खैरात कि जगह नहीं है, कहो खुद हाथ पैर चलाये और खाये! ये सुन कर राजीव के आंसू निकलने लगे, तभी एक पोता आया और बोला, "आप रो क्यों रहे हो"! 

राजीव उसको गोद में उठाते हुये बोले, " आंख में कचरा चला गया था बेटा"! 

अब रमेश बाहर आया और बोला, "पापा कैसे आना हुआ, खाना खा के जाना, अभी मैं आप लोगो को पैसा नहीं भेज पाया, इन दोनों बच्चों कि पढाई लिखाई, पालन-पोषण पता ही है महंगाई कितनी बढ गयी है और माँ नहीं आयी"! 

राजीव ने मन में सोचा ठीक ही है माँ नहीं आयी, वरना कलेजा छलनी हो जाता उसका! 

"नहीं बेटा माँ कि तबीयत थोड़ी ठीक नहीं है", राजीव बोला! 

" ये दिन भर खा के सोने का नतीजा है, माँ से कहो कुछ काम काज करे, और माँ को गांव में ही क्यों नहीं दिखा देते आप, मैंने यहीं बुला लिया होता, पर यहाँ कि मशीनें खराब हैं! 

"नहीं बेटा तुम तकलीफ मत करो आजकल गांव में एक से एक डाक्टर हैं, राजीव बोल पड़ा! 

"सुनो पापा वो जो गांव में घर है ना वो मैं बेचना चाहता हूँ, अपना किल्नीक डालना है, फालतु ही तो है, आप लोगो कि जिंदगी भी कुछ दिनों कि है, आप लोग यहाँ शहर में बहुत से संस्था है, जिसमें बहुत से बुजुर्ग रहते हैं उसी में रह लेना", रमेश बोला! 

" राजीव ने वहाँ से जाने में ही भलाई समझी और बोले,"बेटा अब मैं चलता हूँ तेरी माँ से विचार करके बताऊंगा, मेरी गांव वाली बस छुट जायेगी",! 

जाते जाते उन्होने बहु कि आवाज सुनी कैसे कंजुस दादा हैं,कुछ दिया भी नहीं पोतो को! 

घर पहुँच कर कृष्णा सवालों के बौछार दागती है, लग रहा है खुब आवभगत हुयी है, क्या-क्या खिलाया बहु ने? रमेश कैसा है? एक बार मै भी जाऊंगी उससे मिलने बड़ा दिल करता है! खुद तो बहु का सुख भोग आये! 

ये सब सुन कर राजीव फफक कर रोने लगा और बोला कृष्णा इससे अच्छा हम निसंतान ही रह जाते! पता ना कहाँ कमी रह गयी हमारे परवरिश में!

कृष्णा सब समझ गयी और राजीव को चुप कराया और बोली जो किस्मत में है वो तो भोगना ही है! 

थोड़े दिनो बाद उनको खाने के लाले पड़ने लगे तो राजीव को खेतों में मजदुरी और कृष्णा जी को घर-घर बरतन मांजने पड़े, पर उन्होंने अपना घर नहीं बेचा! 

संयोग से एक दिन उस गांव का एक लड़का इनके घर के सामने से गुजर रहा था, जब इन दोनों कि औलाद नहीं थी तो वो उसको बहुत मानते थे, वो बडा़ अधिकारी बन गया था! उन दोनों कि हालत देख कर उसने उनको वृद्धा पेंशन बंधवा दिया और कुछ रुपये भी दिये! 

राजीव और कृष्णा ने खुब आशिर्वाद दिया!

अचानक एक दिन रमेश गांव आया उसकी नजर गांव वाले घर पर थी, उसी को बेचने आया था! 

राजीव जी और कृष्णा ने इकट्ठे कहा, हमने ये घर वृद्धाश्रम वालों को दान दे दिया है ताकि जिसकी संतान तुम्हारे जैसै निकलेगी यही रह सकेंगे ,काश हम निसंतान ही रह जाते!

रमेश अपना का सा मुंह ले कर चला गया!


Rate this content
Log in

More hindi story from Swati Rani

Similar hindi story from Tragedy