पाती पिया के नाम
पाती पिया के नाम
सुनिए जी,
20 साल हो गए हैं आपको गए हुए, जो जो जिम्मेदारी आपने मुझे सौंपी थी, वो सब मैंने पूरी ईमानदारी से निभा दी है। बेटी काॅलेज में लेक्चरर हो गई है। जब से बहू के चरण घर पर पड़े है तब से बेटे का बिजनेस भी बहुत अच्छा चल रहा है। संध्या दीदी पहले तो शादी के लिए तैयार नहीं थी। कहतीं थी... "एक विधवा से कौन शादी करेगा भाभी।" समय ज़रूर लगा पर मैंने उनको राजी करवा लिया, हमारे ही दूर के रिश्ते में एक भला लड़का था जिससे ब्याह करके दीदी अब सुखपूर्वक हैं।
बेटी का ससुराल से यहाँ आना कम होता है, मन तो बहुत होता है पर मिलने के लिए बेटी के ससुराल बार बार जाना मुझे अच्छा नहीं लगता जी। बेटे को अपने व्यापार से फुर्सत ही नहीं मिलती। दो छोटे बच्चे हैं वो भी अपनी पढ़ाई और खेल कूद में व्यस्त रहते हैं। आस-पड़ोस में भी अब कोई किसी के घर शाम को बैठने या मिलने-जुलने नहीं आता। घुटनों में बहुत दर्द रहता है चलना फिरना बंद जैसा है। अकेले बैठे बैठे थक जाती हूँ ।
सुनिए जी! "आज बहुत नींद आ रही है। कल बात करती हूँ आपसे।"
कलम हाथों से छूट कर गिर गई।
